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किसे पता था मिट्टी अन्धेरें में जला दी जायेगी ( Justice_For_ManishaValmiki ) ( हाथरस गैंग रेप प्रकरण ) __विपिन दिलवरिया

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   किसे पता था मिट्टी अन्धेरें में जला दी जायेगी     ( Justice_For_ManishaValmiki )      ( हाथरस गैंग रेप प्रकरण ) किसे  पता  था  ये   घड़ी  विकट  बन जायेगी कुछ   गन्दी   नज़रें   मेरे  ऊपर  तन   जायेगी किसे   पता   था   आबरू   लूट   ली  जायेगी  गला काटकर  रीढ  की  हड्डी  तोड दी जायेगी पहले  नोच   नोचकर  खाया   सबने  मुझको किसे पता  था  बाद  जीभ  काट  दी  जायेगी खूब   लड़ी    मैं    ज़िन्दगी   मौत   से   मगर किसे पता था  ज़िन्दगी , मौत  से हार जायेगी दिन  के   उजालो   में  लुटी  थी  मेरी  आबरू किसे पता था मिट्टी अन्धेरें में जला दी जायेगी फिर होगी बहस  फिर  ह...

ये इश्क़ कोई गुनाह नहीं ( gazhal ) ( Shayari ) ___विपिन दिलवरिया

     ये इश्क़ कोई गुनाह नहीं त्याग भी है मोहब्बत बस पाना नहीं, आग का दरिया है  इश्क़ आसाँ नहीं फूलों की रहों  पे  भी  कांटे  बिछे है, दूरियाँ भले हो फासलें हो जाना नहीं बड़े नसीबों से मिलती  है  मोहब्बत  यूं  ही  कोई  बिखरा  खज़ाना  नहीं शितम  ढाती   है  मजबूरियाँ  मगर, सब कुछ भूले  पर  याद आना नहीं यूं  बदनाम  ना  कर  मोहब्बत  को,  मोहब्बत ज़िन्दगी है मर  जाना नहीं माना दुश्मन ज़माना इश्क़ का मगर, इबादत है  ये इश्क़ कोई गुनाह नहीं मोहब्बत ख़ुदा बख़्श है"दिलवरिया" किसी का लिबाश  या  गहना  नहीं ख़ुदा बख़्श -  ख़ुदा का उपहार __विपिन दिलवरिया 

समाज के दरिंदे by Vipin Dilwarya

                                 समाज के दरिंदे    बेखौफ घूम रहे है    इस समाज में ऐसे दरिंदे    देश को हुक्मरानों को ये बताना है    नहीं घूम सकती आज भी    बहन , बेटियां जैसे    आसमान में खुले परिंदे    देश के हुक्मरानों को जगाना है    जैसे जलाया है     उन्होंने उस खुले परिंदे को    ऐसे ही उन दरिंदो को जलाना है  By _ Vipin Dilwarya

" आखिर कौन है वो इंसान " ( Rapist poetry ) by Vipin Dilwarya

" आखिर  कौन  है  वो  इंसान "   ( Rapist poetry ) आखिर  कौन  है  वो  इंसान , ना बेटी , ना बहन , ना दिखती है मासूमियत वो इंसान है या हैवान , तीन साल की बच्ची देखता है  ना देखता है 60 साल की औरत , हवस  का  पुजारी  है  वो ना देखता है बच्ची और जवान , आखिर  कौन  है  वो  इंसान..... इंसान , इंसान को मार रहा बेटियों को नोच रहा और कर रहा औरत की इज्ज़त तार - तार रोज हो रहे बलात्कार खबरे आ रही है लगातार आखिर  कौन  है  वो  इंसान जो कर रहा इंसानियत को शर्मशार , आखिर  कौन  है  वो  इंसान..... तू  है  या  मैं  हूं ,  ये  है  या  वो  है , तू भी नहीं मैं भी नहीं , ये भी नहीं  वो भी नहीं सब बनते है अंजान , क्या कोई और है इस समाज में कोई दूसरे ग्रह से आता है क्या , तू भी इस समाज में ,  मैं भी इस समाज में ,  ये भी इस समाज में ,  ...