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मैं वो हिंदुस्तान हूँ मेरे भाई __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

मैं वो हिंदुस्तान हूँ मेरे भाई ना हिन्दु ना मुसलमान  ना सिख ना मैं *इसाई* इंसानियत जिसका धर्म  वो इन्सान हूँ  *मेरे भाई* हर रंग को सजोंकर रखता है  अपनी पेशानी पर तिरंगा जिसकी शान  मैं वो हिंदुस्तान हूँ *मेरे भाई* __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

साहित्य विकास मंच को समर्पित कविता __कवि गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

          *साहित्य विकास मंच* मंच को कवियों का प्रणाम होना चाहिये मंच पर काव्य का गुणगान होना चाहिये शतकवीर  हुआ  है  आज *साहित्य विकास मंच*   आज *मंच के कवियों* का सम्मान होना चाहिये सब  का   अपना-अपना  किरदार  होता है काव्य सृजन के लिये कवि हक़दार होता है कवियों के काव्य पाठ से  बढ़ता  है  काव्य सृजन  काव्य मंच का ऊँचा मस्तक कलमकार से होता है ना रुके ये *कारवां* यूं ही चलता चला जाये साहित्य का ये सिलसिला बढ़ता चला जाये सब का स्वागत करता है *काव्य प्रगति कुन्ज* नव युवा कवियों  को राह दिखाता चला जाये नमन करता है 'गाज़ी' *साहित्य विकास मंच* को ये मंच  यूं ही  दरिया की  तरह  बहता चला जाये *__गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '*       *मेरठ , उत्तर प्रदेश*

सुन री हवा तू धीरे चल ( गीत ) __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

   सुन री हवा तू धीरे चल ( गीत ) सुन री हवा तू धीरे चल उसके सर से दुपट्टा सरक रहा है.......                    सज संवरकर निकली है वो                    यहाँ सारा चमन महक रहा है                     सौन्दर्य ऐसे सोलह श्रृंगार जैसे                    मानो चाँद ज़मीं पर चमक रहा है  सुन री हवा तू धीरे चल उसके सर से दुपट्टा सरक रहा है.......                            || 1 ||                    माथे बिन्दीयाँ आँख में अंजन                     नाक में नथुनीं  हाथ में कंगन                    कान में झुमका चाल में ठुमका           ...

छूट गया तेरा हाथ माँ ( हिन्दी कविता ) __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

  छूट गया तेरा हाथ माँ अब तेरे बिना जीना पड़ेगा माँ तेरे जैसा प्यार कौन करेगा माँ सर से तेरा साया छूट गया अब मेरे कष्टो को कौन हरेगा माँ ज़र्रे-ज़र्रे  में तू  है ,  मेरे साथ है तेरी हर बात माँ सब कुछ मेरे पास है, पर छूट गया तेरा हाथ माँ तुम बिन घर ये सूना,  अब सूना पड़ा ये आँगन माँ घर नहीं ये मकान है, जबसे छूट गया तेरा गात माँ __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '  गात - शरीर

तबस्सुम फिक़ी नज़र आ रही है ( गज़ल ) __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

  तबस्सुम फिक़ी नज़र आ रही है                     ख़िज़ां में शाख़ सूखी नज़र आ रही है तेरे होठों की तबस्सुम फिक़ी नज़र आ रही है                     *** बीच  भँवर  मौन  छाया  हुआ  है  साहिल पर ये लहरें तीखी नज़र आ रही है                     *** खूब सुना तेरे लफ्ज़, लहजे और जुबां को मगर आज इनमें बारीकी नज़र आ रही है                     *** फक़त वाह के क़ाबिल नहीं तेरे फ़साने मुझे इनमें तारीख़ी नज़र आ रही है                     *** तेरी मोहब्बत के तलबगार तो हम थे मगर ये मोहब्बत सर-ए-बाज़ार बिकी नज़र आ रही है                     *** __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

सब कुछ यहाँ बेतरतीब हो गया ( शायरी ) __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

  सब कुछ यहाँ बेतरतीब हो गया किस्सा-ए-मोहब्बत अजीब हो गया सब कुछ यहाँ बेतरतीब हो गया जो था मेरे सबसे करीब यहाँ कम्भख्त वही मेरा रक़ीब हो गया सब कुछ लुटा दिया जिसके लिये वो कहकर छोड़ गया कि तू गरीब हो गया क्या लिक्खा है मेरी तक़दीर में ए ख़ुदा  तू ही बता 'गाज़ी' क्यों इतना बेनसीब हो गया __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

सूरत-ए-हालात ना होने दिया ( गज़ल ) __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

           सूरत-ए-हालात  ना होने दिया रुबरु उनको सूरत-ए-हालात* ना होने दिया, बादल छाये रहे  मगर  बरसात ना होने दिया ढूँढते   रहे    वो   महफ़िल - महफ़िल  मगर, मुन्कशिफ़* तल्ख़ी-ए-हालात* ना होने दिया हिज़्र*  में  उनकी  नागवार  गुजरी  हर  रात, ज़ाहिर   उनको   जज़्बात   ना   होने   दिया कोशिशे   तो  बहुत   की    ज़माने  ने  मगर, मंसूबो  को  उनके  आबाद  ना   होने  दिया मेरे  दुश्मन  चले  थे  हाथ  बढाने  उस ओर, हमने  किसी को  इल्तिफ़ात* ना  होने दिया  खूब टटोला उसनें मेरे दिल की अलमारी को, मेरी मुस्कराहट ने गमों से बात ना होने दिया __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी ' तल्ख़ी-ए-हालात - स्थिति की कडवाहट मुन्कशिफ़ - जाहिर , व्यक्त होना सूरत-ए-हालात - परिस्थितियों की स्थिति हिज्र - जुदाई इल्तिफ़ात - मित्रता

दो गज़ ज़मीं मेरे नाम आई ( शायरी ) __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

दो गज़ ज़मीं मेरे नाम आई देखो आज वो शाम आई  मेरे हिस्से खुशियाँ तमाम आई एक माँ का दामन छूटा तो अपनी बाहें पसारे धरती माँ आई  ज़मींदारी लेकर आई मेरी शहीदी, आज दो गज़ ज़मीं मेरे नाम आई खुशकिस्मत हुँ मैं वतन तेरे लिये, मेरे  ज़िस्म  की  मिट्टी काम आई  __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी ' 

मोहब्बत हो गई तो हो गई ( गज़ल ) __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

मोहब्बत हो गई तो हो गई  कैसे ये दिल मेरा  क्यूं ये बदल गया तुझसे ये मिलकर  क्यूं ये मचल गया कैसे समझाऊं अब दिल समझ ना पाये तेरे सिवा इस दिल को  अब कोई ना भाये  चैन मेरा खो गया नींद मेरी खो गई  क्या करू अब तुम्ही बताओ मोहब्बत हो गई तो हो गई  तेरे जाने के बाद याद आया एहसास प्यार का बाद आया तड़प  रहा  है   तेरी   खातिर लेकर दिल ये फरियाद आया हुआ महसूस बिछड़कर गलत ये बड़ी बात हो गई  चैन मेरा खो गया नींद मेरी खो गई  क्या करू अब तुम्ही बताओ मोहब्बत हो गई तो हो गई  बेसब्र हुँ मैं बेताब हुँ तेरे इंतज़ार में रोज आती हो तुम मेरे ख्वाब में ' गाज़ी '  सब  कुछ  भूल  गया  कटते है रात दिन अब तेरी याद में ये कैसी जंग है यारा  जीतकर भी मेरी ही मात हो गई  चैन मेरा खो गया नींद मेरी खो गई  क्या करू अब तुम्ही बताओ मोहब्बत हो गई तो हो गई  मोहब्बत की पहली बारिश हो रही है  दिल की ये मेरी गुजारिश हो रही है जितनी गुजरे तेरे साथ गुजरे दिल की यही बस ख्वाहिश हो रही है ज़ुदा अब मैं तुझसे कैसे र...

एहसास ( गज़ल ) __ गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

                        एहसास एक एहसास है जो मेरे पास है उसकी याद है उसकी बात है  मेरे साथ उसके जज़्बात है एक एहसास है जो मेरे पास है गवाह ये ज़मीं गवाह ये आसमाँ  गवाह वो वस्ल की बरसात है एक एहसास है जो मेरे पास है है कुछ मजबूरियाँ  जो हम में है दूरियाँ दूर है तो क्या हुआ  मेरे पास उसके खयालात है एक एहसास है जो मेरे पास है खिज़ा की वो शाक नहीं जो यूं टूटकर बिखर जाये मोहब्बत है कोई मदिरा नहीं जो यूं गिरकर उतर जाये कैसे छोड़ दूँ मैं ये साँस"गाज़ी" मेरे पास जीने की आस है  एक एहसास है जो मेरे पास है __गाज़ी आचार्य ' गाज़ी '

मनाओ ये होली ( hindi kavita ) __विपिन दिलवरिया

               मनाओ ये होली नये रंगो  को  मिलाकर मनाओ ये होली पुराने गमो को भुलाकर मनाओ ये होली जला डालो वो  सारे गिले शिकवे जो भी है आज सारे कलुष मिटाकर मनाओ ये होली गुम हो  गया  ज़िन्दगी की भाग दौड में घूम  रहा  ख्वहिशो  की  चादर ओढ के कर्म सारे दर्ज़ होते है उसकी किताब में फिर क्यों  जीना  किसी से मूँह मोड़ के कडवी बोली नहीं मीठी बनाओ ये बोली चलो  आज  खुलकर   मनाओ  ये होली जला डालो वो  सारे गिले शिकवे जो भी है आज सारे कलुष मिटाकर मनाओ ये होली __विपिन दिलवरिया ( मेरठ )

Part - 12 - Thoughtfull Shayari __Vipin Dilwarya

Thoughtfull Shayari (1) ना था मालूम  कि तू इतना बदल जाएगा,,! एक मेरे गिरने से तू इतना संभल जाएगा,,!! (2) ये कोन है जो उँचा उँचा बोल रहा है इन  फिज़ाओं में  ज़हर  घोल रहा है (3) माना सब रिश्तें पराये होते है लेकिन  भाई  , भाई  होते  है (4) मेरे घर का जो सबसे हसीं गहना है,,! वो मेरी बहना है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!! (5) जो  रिश्तें  सब  से  खास  होते है  उनमे सबसे पहले माँ-बाप होते है (6) संभालकर रखे थे जो हमनें, वो सिक्के बांट ले गये आईना तलाशते रहे हम, वो  शीशे  काट ले गये नावाक़िफ़ थे हम  मिज़ाज-ए-फ़ितरत-ए-इंसाँ से हम रिश्तें निभाते रह गये,  वो  हिस्से  बांट ले गये मिज़ाज-ए-फ़ितरत-ए-इंसाँ - मनुष्य के स्वभाव की अवस्था (7) वो  समन्दर* से  भी  गहरे  है,,! जिनमें कुछ अपनें भी चेहरे है,,!! (8) एक पल गम है , एक पल फ़न है तुम - तुम  हो  ,  तो  हम - हम  है क्या भरोसा  ज़िन्दगी  का , जीना है  तो आज जी लो कल तो एक भ्रम है (9) महँगा कर लो ख़ुद ...

बड़ी रुला गई बहना आज तेरी विदाई _विपिन दिलवरिया

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बड़ी रुला गई बहना आज तेरी विदाई खुशियों की इस घड़ी में जाने क्यों आज मेरी आँख भर आई बड़ी रुला गई बहना आज तेरी विदाई जाने क्यों जहन में आज बीते दिनो की बात लौटकर आई मिन्नतो बाद वो रात आई श्रावण माह वो बरसात आई चहल पहल थी घर पर मेरे  घर में जमा थी खूब लुगाई वो पल मेरे समझ ना आया सब चहरों पर हंसी आई जब रोने की एक आवाज आई एक अलग सा शोर हुआ  और सब नें दी बधाई देखो घर में तुम्हारे  बिटिया आई बिटिया आई खिल उठी थी वो आँगनाई जब नन्हें पैर तेरे  खुशियों की सौगात लाई कदम पड़े थे घर में तेरे जब घर में थे हम भाई भाई खुशियों की इस घड़ी में जाने क्यों आज मेरी आँख भर आई बड़ी रुला गई बहना आज तेरी विदाई याद है तुझे वो कहानियाँ याद है तुझे वो शैतानियाँ जब  खेल-खेल  में   हम  करते थे बेईमानियाँ याद है वो बचपन की लड़ाई याद है वो बचपन की पिटाई याद है वो जब लैम्प के चारो  ओर बैठकर हम करते थे पढाई याद है वो पिताजी का पढाना  किताब लेकर जबरदस्ती बैठना याद है वो पढते पढते सो जाना और पिताजी की एक  आवाज पर नींद का उड़ जाना हँसते खेलते लड़ते झगड़ते  जाने  ...

Part - 11 - Thoughtfull Shayari __ Vipin Dilwarya

        Thoughtfull Shayari (1) गलतफहमी रखते है जो,  उन्हें बता दूँ ये सियासत अब वो पुरानी नहीं रही ये 21 वीं सदी का क्रन्तिकारी युग है अब वो 20 वीं सदी वाली बात पुरानी नहीं रही जागीर समझ बैठे है जो दिल्ली को,  उन्हें बता दूँ  ये दिल्ली किसी की खानदानी नहीं रही (2) घना  कोहरा  ठंड  बढ़ रही है  गरीबी फुटपात पर मर रही है ना सर पर छत है ना तन पर कपड़ा  जिसके सहारे  जीने  की उम्मीद थी वो धूप निकलने से डर रही है (3) चाहो तो बदल सकता है उनका नज़रिया तुम्हारे लिये ख़ुद एक बर बदलकर तो देखो ख़ुद ब ख़ुद संभल जाएगा ये ज़माना ख़ुद एक बार संभलकर तो देखो (4) देखो ये  जी  का  जंजाल  बन गया है,,! ये जनसैलाब आज सवाल बन गया है,,!! गुस्ताखी कर बैठी है ये हवायें दियो से,,! देखो ये दिया आज मशाल बन गया है,,!! (5) बहारें गयी अब ख़िज़ां चल रही है,,,,,,,,,,,,,,,,,,! कोई बताओ हुक्मरानों को फ़िज़ा बदल रही है,,!! (6) एक तरफ जवान है , एक तरफ किसान है  दोनों इस मिट्टी पर छिडकते अपनी जान है क्यों आमने-सामने  है  वो आज य...

ये मेरा हिन्दुस्तान है ( हिन्दी कविता ) __विपिन दिलवरिया

                 ये मेरा हिन्दुस्तान है शौर्य की मिसाल है  तिरंगा जिसकी पहचान है ये मेरा हिन्दुस्तान है सीने पर गोली खायी आज़ादी की अलख जगाई इस मिट्टी में जन्मे  सुभाषचंद्र बोस,भगतसिंह  राजगुरु,सुखदेव जैसे इन्सान है इस मिट्टी पर अपनें खून से  लिक्खी आज़ादी की दास्तान है  ये मेरा हिन्दुस्तान है ना कभी हम घबराये ना कभी कदम डगमगाये बैठे सरहद पर सीना तान है ऐसे मेरे देश के जवान है ये मेरा हिन्दुस्तान है भाईचारे की मिसाल है सर्वधर्म है मेरा भारत यहाँ हिन्दु है मुसलमान है पनाह दी हर मज़हब को  ऐसा मेरा भारत महान है एक घर में रहती  यहाँ गीता और कुरान है ये मेरा हिन्दुस्तान है इस मिट्टी में जन्में श्याम  इस मिट्टी में जन्में राम है इस मिट्टी में जन्में महावीर स्वामी इस मिट्टी में जन्में बुद्ध भगवान है ये मेरा हिंदुस्तान है इस मिट्टी में जन्में गाँधी, फूले और पटेल इस मिट्टी में जन्में भीमराव  अम्बेडकर जैसे विद्वान है ये मेरा हिन्दुस्तान है इस मिट्टी में जन्में  वाग्भट, मिहिर, आर्यभट्ट इस मिट्टी में जन्में ...

Part - 10 - Thoughtfull Shayari __Vipin Dilwarya

    Thoughtfull Shayari (1) अमीर-ए-शहर है सुनवाई क्या होगी अदालत में ! ग़रीबी गुनाह  है  जनाब क्या रखा है वकालत में !! (2) आसमाँ गुल्ज़ार है मगर परिंदा घबराया है,,! लगता है उनके घरो पर खतरा मंडराया है,,!! (3) एक पल की जान पहचान दूजे पल इज़हार देख उसका रंग रूप और कर देते है इकरार  इक मुलाकात दिन में और दूजी में हुई रात ये प्यार नहीं पगली ये है जिस्मों का व्यापार (4) घरो में कैद करके सबके रोजगारों को पेल गया किसी के अपने ले गया किसी के सपनों से खेल गया अजीब था ये साल '2020' साला  '20' , '20' खेल गया (5) कम्भक्त  ये पांव  भी  पड़ाव नहीं लेते किसी डगर पर  ये अटकाव नहीं लेते कोन डगर थमेंगे तेरे पांव"दिलवरिया" आजकल ये दरख्त भी छांव नहीं देते (6) उसनें किया, माना वो छल था चोट मिली  वो  गुजरा पल था कर्म सबके अपने-अपने,,,मुझे मरहम मिला कर्मों का फ़ल था (7) इत्तफाक*बहुत कम लोग रखते है मुझसे क्योंकि मैं किसी से समझौता नहीं करता (8) हम वो नहीं जो जताया करते है,,,,,,,,,,!! अहसान करके हम भूल जाया करते है,,!! (9) हर नये  साल के  साथ...

इश्क़ के चक्कर ने हाल बड़े बेहाल कर दिये __विपिन दिलवरिया

  इश्क़ के चक्कर ने हाल बड़े                   बेहाल कर दिये जिसके  लिये  हमनें  ख़याल  बड़े कर दिये दो लफ्ज़ कहे  उसनें  बवाल खड़े कर दिये ज़मानें के फिक्र  छोड़  संभाला  था उनको सरे बाज़ार उसने हम कंगाल खड़े कर दिये सिवा दर्द के कुछ ना मिला इस मोहब्बत में इश्क़ के चक्कर ने हाल बड़े बेहाल कर दिये __विपिन दिलवरिया ( मेरठ )

Part - 6 - Love shayari by Vipin Dilwarya

   Part - 6 - Love shayari (1) मोहब्बत किस  से  है  बड़ी  उलझन में  बैठा हुँ  याद उसकी आती है और मोबाइल उठा लेता हुँ (2) ज़िन्दगी पूरी बर्बाद हो गयी संभला ही था कि मोहब्बत फिर  से  एक  बार हो गयी (3) तुझे अपना बनाकर मैं रख लूँ   खुशियाँ देदूँ तुझे सारे जहाँ की  और गम को छुपाकर मैं रख लूँ  चिराग़ मोहब्बत का रौशन रहे रोशनी तेरे जीवन में भर दूँ और अंधेरा चुराकर मैं रख लूँ  (4) दो लफ्ज़ नहीं तु पूरी रुबाई है मेरे दिल में बस तु ही समाई है सब कुछ गवांया इस बाज़ार-ए-इश्क़ में  एक बस तु ही तो मेरी कमाई है (5) चाहकर छोड़ देने को  इश्क़ नहीं कहते,,,! छोडकर भी जो चाहे उसे इश्क़ कहते है,,!! (6) ये ज़मीन मेरा बिस्तर  आस्माँ मेरा कम्बल हो जाये कुछ भी तो नहीं चाहता  ज़िन्दगी से,पर तु मिल जाये  तो ज़िन्दगी मुकम्मल हो जाये (7) इश्क़ के राग से नहीं चलती है ये ज़िन्दगी  त्याग से चलती है (8) मैं तेरे लिये  सब कुछ कर सकता हुँ बस मर नहीं सकता,,,,,,!! मैं मर गया तो तेरे लिये  सब कुछ नहीं कर सकता,,,!! (9)...

Part - 7 - Heart broken shayari __Vipin Dilwarya

  Heart broken shayari (1) जब जब जिससे उम्मीद की  तब तब टूटकर बिखरा हुँ जख्म भी अब  तो मोहब्बत कर बैठा मुझसे तभी तो इतने  जख्म लेकर भी खुश दिखरा हुँ (2) ना कर बदनाम यूं ज़माने में एक उम्र लगती है इज़्जत कमानें में इतनी तोहमते ना लगा मेरे ऊपर कि ज़िन्दगी गुज़र जाये खुद को बेकसूर बताने मे (3) भरी महफ़िल उसनें इल्ज़ाम कुछ यूं लगया,,,,,!! मुझको गुनाहगार और ख़ुद को बेकसूर बताया,!! (4) आज  कल  वफाओं  से   हिजाब  कर  रहा हुँ,! उस ख्वाब सी  ज़िन्दगी का हिसाब कर रहा हुँ,!! आबाद हुई थी जो उसकी मोहब्बत से ज़िन्दगी,!  उस  आबाद  ज़िन्दगी  को  बर्बाद  कर  रहा हुँ,!! हिजाब - पर्दा  (5) रहगुज़र हमें मालूम है हमनें ख़ुद ज़िन्दगी दर-बदर की है,,!! मेरी बर्बादी बयां करती है हमनें  मोहब्बत किस  क़दर की है,,!! (6) ऐ खुशी अब मैं तेरा ना रहा,,,,,,,,,,,,,,,!! मैं नीलाम हो चुका हुँ ग़म के बाज़ार में,,!! (7) एक एक पल फुरक़त में कैसे आगे बढता है,,! और वो कहते है कि हमे क्या फर्क पड़ता है,,!! फुरक़त - वियोग, जुदाई (8) जिस...

Part - 9 - Thoughtfull Shayari __Vipin Dilwarya

    Thoughtfull Shayari (1) शाम यूं ही नहीं ढलती शाम ढलती है तो रात होती है बिगड़ना कोई बुरी बात नहीं बिगडते है बदल तो बरसात होती है बेवजह नहीं निकलती कोई बात जुबाँ से, हर बात में कुछ बात होती है (2) एक बात बताओ ना चाहते क्या हो ये बताओ ना शहीद हुए है जवान हमारे उनको इन्साफ दिलाओ ना पीस, शान्ती, चैन, अमन,  कब तक निभाओगे  छोडों ये अमन की बात  उसकी औकात दिखाओ ना (3) ये शाम दुल्हन सी कुछ ऐसे सज़ आई है,,,,,,,,,,!! मानो भोर की पहली किरण बारात लेकर आई है,!! (4) वो दूर खड़ा जो प्यारा सा मुखड़ा है,, वो मुखड़ा  मेरे  ज़िगर का टुकड़ा है,,😘😘 (5) सलीका सिखाते रहे जो खुशियों का ज़िन्दगी भर,,!! वो सबसे  महगें  बिके  है आज गम के बाज़ार में,,!! (6) कुछ तो बात है जो तेरा साथ है,,!! वरना लकीरे भी मेरे खिलाफ़ है,,,!! (7)                          ***   ए मुंतशिर तुमसे हमसा, हर कोई                  मुताशिर  नहीं  बन  सकता,,,   सब, ...