( शायरी )"काश वो आती ही नहीं" by Vipin Dilwarya

              ( शायरी )
    "काश वो आती ही नहीं"


अगर होती अंजान सुरो से
तो वो गीत गाती नहीं

मैं गाता रहा मैं कहता रहा
और वो आजमाती रहीं

ना होती कुबूल मेरी मोहब्बत
तो वो शर्माती नहीं

मोहब्बत के सफ़र में
वो हमसफ़र तो बन गए

मैं मोहब्बत करता गया
वो मोहब्बत का मज़ाक बनाती रही

सात जन्म की बात करके
पल भर में रिश्ता तोड़ गई

अगर होती मोहब्बत उसे
तो मुझे छोड़कर जाती नहीं

दर्द - ए - मोहब्बत
बड़ा ज़ालिम है यारो
काश इससे तो वो आती ही नहीं


By _ Vipin Dilwarya

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