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दोस्त कम और दुश्मन ज्यादा है ( Shayari ) by Vipin Dilwarya

 दोस्त कम और दुश्मन ज्यादा है छोड़ दी वो बदनाम गलियाँ  साहब इसलिये  आज कल खूबियाँ कम और कमियाँ ज्यादा है.... सच्चाई  की  गलियों  में ईमानदारी का आशियानाँ है अब हमारा इसलिये दोस्त कम और दुश्मन ज्यादा है.... और गैरो से गिला क्या करें मेरी   परछाई   भी   मेरे   खिलाफ़  है  ए ख़ुदा अब तु भी बता दें तेरा क्या ईरादा है.... __विपिन दिलवरिया 

" मेरी आयत नहीं पूरी कुरआन है तु " by Vipin Dilwarya

    " मेरी आयत नहीं पूरी कुरआन है तु " मेरा इश्क़ है  तु  मेरा ईमान  है  तु मेरी आयत नहीं पूरी कुरआन है तु इस कदर तेरे इश्क़ में टूट चुका हूँ  बीच  भंवर  में  जैसे  डूब चुका  हूँ  सासें थम चुकी धड़कनें नहीं रुकी है पलके झुंक चुकी है आस नहीं टूटी है महताब है तु  मेरा  आफ़ताब  है तु मेरे धड़कते  दिल की  आवाज़ है तु मेरी  जान  है  तु  मेरा जहान  है  तु मेरी चाहतों का खुला आसमान है तु मेरी अज़ान  है तु मेरा रमज़ान है तु मेरी आयत नहीं पूरी कुरआन  है तु __विपिन दिलवरिया 

"अश्क़ बहाकर समन्दर भरे है" ( Song ) by Vipin Dilwarya

            "अश्क़ बहाकर समन्दर भरे है"                         ( Song ) ए ख़ुदा... मोहब्बत की वो  कौन सी किताब है जिसमे... लिखा  हर  आशिक़  का  हिसाब  है काश पढ़ लिया होता... तो   सच्चा   इश्क़  ना  करता  मैं भी मुझे क्या पता... सच्चे इश्क़ में  बिछडनें का रिवाज़ है : Music:;;;;;;;;;;;;;;;;;;,,,,,,,,,,,,,,,, : अश्क़ बहाकर   समन्दर भरे है तेरे  दिये   जख्म   सारे  हरे  है.... तेरे   बगैर    कैसे    जीएँ   हम ज़िन्दा है लेकिन  कब के मरे है.... अश्क़  बहाकर  समन्दर  भरे है ख़ुद में है  लेकिन  ख़ुद से परे है.... खौफ़   नहीं   इस  ज़िन्दगी  से डरते नहीं लेकिन ख़ुद से डरे है.... Music :;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;,,,,,,,,,,,, दिल का करें  क्या  तु इतना बता मोहब्बत करी...

सच्चे इश्क़ में बिछडनें का रिवाज़ है ( Shayari ) by Vipin Dilwarya

सच्चे इश्क़ में बिछडनें का रिवाज़ है ए ख़ुदा...  मोहब्बत की  वो  कौन सी किताब है जिसमे...  लिखा  हर  आशिक़  का  हिसाब  है काश पढ़ लिया होता... तो   सच्चा   इश्क़  ना  करता  मैं भी मुझे क्या पता...  सच्चे इश्क़ में बिछडनें का रिवाज़ है __विपिन दिलवरिया 

Part - 3 " Love shayari " by Vipin Dilwarya

Part - 3 Love shayari (1) काई सी ज़म गई है तेरी यादों पर  आज भी तेरी यादें हरी सी रहती है (2) तेरी डूबती कश्ती को साहिल पर ले आऊंगा मैं वो रहनुमा हूँ तुझे  मंजिल तक ले जाऊंगा (3) फिज़ूल  है  सारी  दलीलें   सारे  गवाह  मोहब्बत की अदालत में  यहाँ इन्साफ मिलता है ना सुकून ये झूँठें, फरेबी, धोखेबाजो की मण्डी है  यहाँ  कोई  नही  जीता  सदाकत  में (4) हाल पुछा... वो झूँठ बताते है... खयाल पुछा... वो चुप हो जाते है... कुछ ना पुछा... तो वो रूठ जाते है... (5) बड़ी मशहूर मेरी कहानियाँ.... मैं शायर बड़ा बद्तमीज़ अ.... बदनाम आशिक़"दिलवरिया".... फिर भी जहाँ-ए-इश्क़ मुरीद अ.... (6) निगाह का हक है उस चेहरें को देख के आह निकलती है जिस चेहरें को (7) तु ही नज़र आती है जब पलकें झपकतें हैं जब पलकें उठती है  बस आँसू  टपकतें हैं (8) हम ख़ुद में गुम हो गये हैं जब से,वो आप से तुम हो गये हैं (9) आ जाओ मेरी प्रीत बनक...

ख्वाबों में मुलाक़ात हो जाये ( Shayari ) by Vipin Dilwarya

ख्वाबों में मुलाक़ात हो जाये आज खुद से..  कुछ सवालात हो जाये.. चलो सो के देखतें है.. क्या पाता ख्वाबों में मुलाक़ात हो जाये.. आरज़ू तो.. फ़कत एक दीदार की है.. क्या पाता आज उनसे कुछ बात हो जाये.. वो कहते रहें.. मैं सुनता रहा बड़े इतमिनान से.. क्या पाता कब कौन सी बात खास हो जाये.. __विपिन दिलवरिया 

एक रोटी ( हिन्दी कविता ) by Vipin Dilwarya

                     " एक रोटी " "एक रोटी" के लिये ना जाने क्या-क्या करना पड़ता हैं..! ज़िन्दगी के हर हालात हर दौर से गुज़रना पड़ता है..! दिन - रात , सुबह - शाम  कभी  यहाँ , कभी   वहाँ दर-दर की ठोकर खाना पड़ता है..! कड़कड़ाती ठंड हो या हो  तपती  गर्मी "एक रोटी" के लिये खून पसीना एक करना पड़ता है..! "एक रोटी" अपना बना देती है "एक रोटी" दुश्मन बना देती है "एक रोटी" फ़कीर बना देती है "एक  रोटी"   चौर  बना देती है "एक रोटी" के लिये ज़िन्दगी भर भटकना पड़ता है..! जो रोटी बख़्शती है  ज़िन्दगी , उस रोटी के लिये  एक  दिन  मर  जाना  पड़ता है..! "एक रोटी" के लिये बहुत  कुछ  करना  पड़ता हैं..! बहुत कुछ छिपाना पड़ता है बहुत कुछ दिखाना पड़ता है कुछ लोगों को हसाँना पड़ता है कुछ लोगों को सताना पड़ता है कभी-कभी "दिलवरिया" खुद का तमाशा बनाना पड़ता है..! "एक रोटी" के लिये हद से  गुज़र  जाना  पड़ता है..! "एक रोटी" के लिय...