" मेरी आयत नहीं पूरी कुरआन है तु " by Vipin Dilwarya

    " मेरी आयत नहीं पूरी कुरआन है तु "



मेरा इश्क़ है  तु  मेरा ईमान  है  तु
मेरी आयत नहीं पूरी कुरआन है तु

इस कदर तेरे इश्क़ में टूट चुका हूँ 
बीच  भंवर  में  जैसे  डूब चुका  हूँ 

सासें थम चुकी धड़कनें नहीं रुकी है
पलके झुंक चुकी है आस नहीं टूटी है

महताब है तु  मेरा  आफ़ताब  है तु
मेरे धड़कते  दिल की  आवाज़ है तु

मेरी  जान  है  तु  मेरा जहान  है  तु
मेरी चाहतों का खुला आसमान है तु

मेरी अज़ान  है तु मेरा रमज़ान है तु
मेरी आयत नहीं पूरी कुरआन  है तु


__विपिन दिलवरिया 

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