Part - 2 Love Shayari by Vipin Dilwarya

" Love Shayari "



(1)

जो कल तक मेरी बाहों में था
जिसका पल्लू मेरे हाथों में था
वो आज अपना पल्लू झटक रहा है

ना जाने क्यों मोहब्बत की बातें
करते करते अटक रहा है

कुछ तो राज़ है उसके ज़हन में
तभी  तो  गिरती बर्फ
में भी उसका पसीना टपक रहा है

(2)

ख़ुदा के बन्दें है सभी यहाँ
मगर सभी नेक ना हो सके
इश्क़ दरिया हम दो किनारें
इसलिये कभी एक ना हो सके

(3)

एक शख़्स जिसकी अहमियत इस क़दर है
ये  मेरा  दिल  उसके  लिये  दरबदर   है

भटक रहा है मोहब्बत की आवारा गलियों में
न  जाने  अभी  बाकी  कितना  सफ़र  है

बदनाम  हो  गया  जहान - ए - इश्क़  में
सारे जहाँ को ख़बर है बस एक वो बेख़बर है


(4)

मेरी आदत नहीं  तु  इबादत है
बेन्तेहा मोहब्बत करते है तुझसे
मेरी जरुरत नही तु अमानत है



By _ Vipin Dilwarya

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