वो छलकता जाम है ( Shayari ) by Vipin Dilwarya


वो छलकता जाम है




 बुझती हुई धुआं तो जलती का नाम आग है
उगती का नाम सुबह तो ढलती का नाम शाम है


अगर मोहब्बत शराब है इश्क़ के मैखाने में
तो नशा हूँ मैं उसका वो मेरा छलकता जाम है


और बेवजह बदनाम करता है
मेरी मोहब्बत को ये जमाना , तो करें


अगर  उसकी  मोहब्बत  में  मैं  बदनाम  हूँ
तो  उसकी  मोहब्बत  मेरे  लिये  सरेआम है



__विपिन दिलवरिया

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