सफर By Vipin Dilwarya ( published by Amar Ujala kavya mere alfaz )
सफर ऐ इंसान तु कर्म कर सफर कब खत्म होता है । थोड़ी देर का तो ठहराव है , सफर फिर शुरू होता है ऐ इंसान तु कर्म कर सफर कब खत्म होता है .... मौत सफर का अंत नहीं , इसलिए ही तो पुनर्जन्म होता है , कितने भी राज दफन हो सीने में ईश्वर के दरबार में सबका खुलासा होता है । ऐ इंसान तु कर्म कर सफर कब खत्म होता है सफर कब खत्म होता हैं.... ये कर्मो का लेखा - जोखा ही तो है , जिस कारण सफर खत्म नहीं होता तु कर्म कर कर्मो में ही तो स्वर्ग - नरक छुपा होता हैं । ऐ इंसान तु कर्म कर सफर कब खत्म होता हैं सफर कब खत्म होता हैं ...... मतलब के लिए क्या - क्या नहीं करता इंसान, इंसान अपने ही बुने जाल में फंसा होता है । अच्छे कर्म वो है जो दूसरो को खुशियां दे सम्मान दे , ...





grt job bhai
ReplyDeleteThanks bro
Deletegazab
ReplyDeleteThank u bhai
DeleteGood morning sar
ReplyDeleteGood morning sir ji🙏
DeleteKya baat h apki shayari mei
ReplyDeleteThank u Bhai 🙏🙏
DeleteGajab shaýari
ReplyDeleteThanks...
DeleteDil pe lag gai bhai
ReplyDeleteGood
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