कौरी किताब मेरी ज़िन्दगी by Vipin Dilwarya ( published by Amar Ujala kavya )

 कौरी  किताब  मेरी  ज़िन्दगी



कौरी  किताब  मेरी  ज़िन्दगी
शब्दों  की  ज़रूरत  है  मुझे ,

तु लिख दें मुझ पर कुछ ऐसा
मोती जैसे चमके रोशन करदे ,

हर दिल की चाहत बन जाए
कौरी  किताब  मेरी  ज़िन्दगी ,

मेरी किताब के हर अध्याय में
बस तेरी कलम के निशान हो 

मेरी किताब  के  हर पन्ने पर
तेरी कलम  से  लिखे शब्द हो

संवार  दे  शब्द  समूह  से
कोरी  किताब  मेरी  ज़िन्दगी



By_ Vipin Dilwarya

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

सफर By Vipin Dilwarya ( published by Amar Ujala kavya mere alfaz )

डगमगाते कदम by Vipin Dilwarya ( Published by newspaper & Amar Ujala kavya )

"" ऐसा परिवर्तन किस काम का "" by Vipin Dilwarya ( published by Amar Ujala kavya )