अनाथ बच्ची एक नन्ही सी जान.. मैं मासूम थी , नादान थी , हर बात से अंजान थी । मेरा कुसूर क्या था जो तूने मुझे छोड़ दिया , मैं तो नन्ही सी जान थी ।। बोझ समझा तुमने मुझे क्या मैं इतनी बुरी थी , लड़की हूं मैं तो इसमें मेरी क्या गलती थी । मेरा जीवन तो तेरी देन है फिर क्यूं हम में इतनी दूरी थी , जब तूने मुझे छोड़ दिया तो मैं अन्दर से टूट गई थी । मां.. तुझे मुझ पर तन भी तरस ना आया , कि मुझ पर क्या बीतेगी मैं तेरे बिना कैसे रह पाऊंगी । मां.. तू तो मुझे समझती , मैं अगर लड़की हूं तो तू भी किसी की लड़की थी । लड़की होना अगर गुनाह है पाप है तो वो पाप कभी तूने भी किया था । अपने से दूर ही करना था तो मुझे पैदा क्यों किया था । जिस पल मैं पैदा हुई ना जाने वो काला दिन था या कली रात थी । कैसी किस्मत मैंने पाई मां बाप के होते हुए भी मै अनाथ थी । मैं मासूम थी , नादान थी , हर बात से अंजान थी । मेरा कुसूर क्या था जो तूने मुझे छोड़ दिया मैं तो नन्ही सी जान थी ।। ...
Nic
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