ज़िन्दगी भी मुकर गई ( शायरी ) __विपिन दिलवरिया



                   ज़िन्दगी भी मुकर गई 



ज़िन्दगी  की  तलाश 
में ज़िन्दगी गुज़र गई 

दौडता  रहा  घड़ी  का 
पहियां ताऊम्र मेरे साथ 

वक्त   पड़ा   घड़ी   भी 
साथ छोड़कर निकल गई 

गुमाँ  करता   रहा  उम्र
 भर  जिस  ज़िन्दगी पर

एक उम्र आई तो हमसे
 ज़िन्दगी  भी  मुकर गई 



__विपिन दिलवरिया 

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