Part - 8 - Thoughtfull Shayari __ Vipin Dilwarya

        Part - 8 - Thoughtfull Shayari



(1)

एक एक ईंट से
मिलकर मकान बनता है,,,!!
और छोटी-छोटी कोशिशों
से ही इन्सान महान बनता है,,,!!

(2)

मेरी कहानी मेरी नहीं तुमसे मिलकर बनी है
बिछड़कर लिखी थी कुछ शायरियाँ आज पूरा
शहर कहता है तुमसा कोई सुख़नवर नहीं है

(3)

कल कहीं नहीं कल एक धोखा है
जो करना है करले आज मौका है

(4)

पैसों से मकान बनाया जा सकता है,,,!!
"घर"
बनानें के लिये परिवार की जरुरत पडती है,,,,,!!

पैसों  से  डर  बनाया  जा सकता है,,,!!
"इज़्जत"
बनानें के लिये व्यवहार की जरुरत पडती है,,,,!!

(5)

स्याही बनकर तकदीर
ज़िन्दगी के पन्नो पे इस तरह बिखरी
कुछ पन्ने सँवर गये कुछ कोरे रह गये

ख्वाबों की दूनियाँ से
कुछ सपनें चुराये थे मैनें
कुछ अधुरे रह गये कुछ पूरे हो गये

(6)

"ज़िन्दगी",,,,,,,,क्या ये सीरत है,,?
सूरत-ए-आईना खूब दिखाते थे,,,!!

"हक़ीकत",,,,क्या ये ज़िन्दगी है,,?
ख्वाब तो बड़े हसीन दिखाते थे,,,!!

(7)

बुरा आदमी को कहता हुँ ना औरत को कहता हुँ
बुरा मैं  सिर्फ गंदी  मानसिक सोच  को कहता हुँ



__विपिन दिलवरिया

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