इन्सान कभी ना बनना चाहे ( हिन्दी कविता ) __विपिन दिलवरिया

         

इन्सान कभी ना बनना चाहे 



जग में ऊँचा नाम हो जाये,
पर  काम कभी  ना  करना  चाहे,,!!

जीतना चाहे मौत से भी, 
पर ख़ुद से  कभी ना लड़ना चाहे,,!!

सब चाहे क्रांति आये, पर 
भगतसिंह  कोई  ना  बनना चाहे,,!!

सबको  देशभक्ति 
का   पाठ   पढाये , पर
ख़ुद पासबान भी ना बनना चाहे,,!!

धर्मों की जो लड़ाई लड़ते,
गीता क़ुरान कभी ना पढना चाहे,!!

बनना चाहे हिन्दु मुस्लिम,
पर इन्सान कभी ना बनना चाहे,,!!

चाहता है बस पुण्य कमाए,
पर  दान  कभी  ना  करना चाहे,,!!

वधु  चाहिये  सबको
सीता   जैसी  "दिलवरिया"
पर ख़ुद राम कभी ना बनना चाहे,!!


__विपिन दिलवरिया 

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

मोहब्बत की कहानी by Vipin Dilwarya ( published by Amar Ujala kavya )

सफर By Vipin Dilwarya ( published by Amar Ujala kavya mere alfaz )

[ अनाथ बच्ची ] एक नन्ही सी जान.. by Vipin Dilwarya ( published by Amar Ujala kavya )