" भूख "
हे ईश्वर तेरा खेल निराला होता है...
सबको समान बनाया तूने ,
कोई अमीर तो कोई गरीब क्यों होता है ?
तेरा बनाया इंसान भूखा ही रहता है ,
कोई धन दौलत का , कोई शोहरत का
तो कोई पेट का भूखा होता है ।
कोई छप्पन भोग खाकर सोता है ,
तो कोई एक वक्त की रोटी को तरसता है ।
ईश्वर तेरा खेल समझ नहीं आता ,
एक सूखी रोटी समझकर फेक देता है
दूसरा भूखे पेट सो जाता है ।
हे ईश्वर तेरा खेल निराला होता हैं...
हे ईश्वर जब तेरे दरबार में
कोई भेदभाव नहीं होता है ,
इंसान धरती पर जन्म लेता हैं
कोई मखमल के गद्दों पर
तो कोई चटाई पर पैदा क्यों होता हैं ?
किस्मत का खेल तूने क्या खूब बनाया
कोई पैदा होते ही राजकुमार बन जाता है ,
तो कोई पैदा होते ही फ़कीर कहलाता हैं ।
हे ईश्वर तेरा खेल निराला होता है...
फेंक देते है जो सूखी रोटी समझकर
काश उस रोटी की अहमियत समझ पाता ,
सूखी रोटी की कीमत क्या होती है ,
उस से पूछ जो हालात का मारा होता है ।
हे ईश्वर तेरा खेल निराला होता हैं...
https://vipindilwarya.blogspot.com
By _ Vipin Dilwarya
Superb 👌👌
ReplyDeleteBahut Sundar Bhai
ReplyDeleteThanks a lot
Deletevery nice
ReplyDeleteThan you so much Sachin bhai
DeleteNice line
ReplyDeleteThank you so much
DeleteBeautiful line
ReplyDeleteThank u Bhai 🙏
DeleteThank u 🙏
ReplyDeleteRealizing that you can are you have doing.
ReplyDeleteThanks u so much Bhai🙏🙏🙏
DeleteNC thought
ReplyDeleteThanks a lot
DeleteOsm
ReplyDeleteThank u so much
DeleteSuper
ReplyDeleteThanks .. a lot
DeleteSuper
ReplyDeleteThank u so much
DeleteWah bhai
ReplyDeleteThanks brother
DeleteNice
ReplyDeleteThanks
Deleteअसत्य पर सत्य की जीत के त्योहार
ReplyDeleteविजयदशमी की आपको और आपके परिवार को
हार्दिक शुभकामनाएं… ईश्वर आपको नई ऊंचाइयां दें। Regards - " BH Motivation 🔥
Happy dasehra
DeleteOsm and happy dashahra
ReplyDeleteThanks bro
DeleteHappy dashehra
Nice bhai vipin
ReplyDeleteThank u bhai
DeleteSuperb
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