बात खानदानी करता हुँ ( शायरी ) __विपिन दिलवरिया



                  बात खानदानी करता हुँ



इंसानों से मैं बात इंसानी करता हुँ

बद्जुबानों से मैं बात बद्जुबानी करता हुँ

अपनी औकात से जो बाहर बात करते है

उनसे मैं  बात  खानदानी करता हुँ

रूह से मोहब्बत उसको रास ना आई

आज कल उनसे मैै बात ज़िस्मानी करता हुँ



__विपिन दिलवरिया 

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