इश्क़ फ़रमानें का हुनर भी आता है ( Shayari ) __विपिन दिलवरिया


इश्क़ फ़रमानें का हुनर भी आता है



इश्क़ है तो इश्क़ 
फ़रमानें का हुनर भी आता है

ना हो मंजूर अगर
हमें छुपाने का हुनर भी आता है

मुकम्मल है मेरी मोहब्बत 
सिर्फ मुझसे, हमें दूर रहकर
निभानें का हुनर भी आता है

गुजरनें से डरती है 
जिस भँवर से कश्तियाँ, उन्हें
पार लगाने का हुनर भी आता है

वो तैराक बड़े कमाल के है मगर
हमें कमाल डुबानें का हुनर भी आता है


__विपिन दिलवरिया

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