बेवफ़ाई क्या छोड़ी हमसे वफ़ा रूठ गई ( हिन्दी कविता ) ____विपिन दिलवरिया



बेवफ़ाई क्या छोड़ी हमसे वफ़ा रूठ गई 



तुफानों   में   कभी    पत्ते   भी  ना  झडें 
हल्की   सी    हवा   में    शाक   टूट  गई

समुंदर डुबो  ना  सका  जिस  कश्ती को
वो  कश्ती   साहिल   पे  आकर  डूब गई

दूनियाँ हमारे  खौफ़  से  झुक  जाती थी
हम शरीफ़  हुए  तो  दूनियाँ  ही  छूट गई

इश्क़   समुंदर    दिल    दरिया   है  मेरा
जिसने  जब  चाहा  वो  आकर  कूद गई

दरिया बहता था  कभी  हमारी  आँख से 
देख हालात-ए-इश्क़ मेरी आँखें सूख गई

इश्क़ की गलियों के  बदनाम आशिक़ है
बेवफ़ाई क्या छोड़ी  हमसे वफ़ा रूठ गई

अब  किसे बयां  करूं मैं अपनी कहानी
जिसे सुनाई थी  शान  से वो ही भूल गई

गिला   करे    तो    किससे    करे    हम
मेरी   तकदीर   ख़ुद    मुझसे   रूठ  गई

नाकामयाबी बड़े तज़ुर्बे दे गई "दिलवरिया" 
जितने अपने है उन सबकी पोल खुल गई


___विपिन दिलवरिया 

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