Part - 6 - Thoughtfull Shayari ___विपिन दिलवरिया

    Part - 6 - Thoughtfull Shayari



(1)

ख्वाहिशें उतनी रखो ज़िन्दगी में
जितने में खुश रह सको
वरना  ज्यादा ख्वाहिशें खुशियों
को  बर्बाद  कर  देती है

(2)

डूबना चाहता हुँ मैं
समन्दर की गहराई में...
ये समन्दर है कि मुझें
साहिल पर ले जानें में लगा है...

(3)

ज़िन्दगी का सफ़र यूं कट जाता है
जब हमसफर हमसा मिल जाता है

(4)

सुखे हुए पत्ते से पुछो गिरने का डर क्या होता है
वरना  शाक  तो  पतझड़  का  इंतज़ार करती है

(5)

झूँठो की दूनियाँ में
बेइमानों की बस्ती है साहब
यहाँ लोग दूसरों के घरों में झाँकतें है...
और बेइमानी खून में है जिनके
वो हमसे ईमानदारी के सबूत माँगते है...

(6)

वक्त के थपेडों नें
कभी इस पार तो कभी उस पर किये...

मुश्किल वक्त में कुछ
नें वार किये तो कुछ नें उपकार किये...

आज मैनें अपनी
किताब  से   कुछ  पन्ने  बाहर  किये...

शुक्र है तेरा कोरोना,
कुछ लोगों के तूने मुखोटे उतार दिये...

(7)

हौंसलों  से  आस्माँ  चूम  लेता है
हो अरमाँ तो
अंधेरों  में  उजाला  ढूँढ  लेता  है

दरिया मोहतज़ नहीं रहगुज़र का,
दरिया  ख़ुद समन्दर  ढूंढ लेता है

(8)

ना इतरा द्रुत* तरक्की पर जो बुराईयों से मिली है
अक्सर कश्तियाँ डूबनें से पहले बहुत तेज हिली है

द्रुत - तीव्र , शीघ्र , तेज

(9)

हिम्मत नहीं हारी मैनें,
मैं हर दौर से लड़ रहा हुँ
कांटो भरी रहगुज़र,
मैं आज भी सफ़र कर रहा हुँ

(10)

खूब मिले खरीददार
हम कहां बिकने वाले है

वो छिपनें वाले सोचते है
हम कहां दिखने वाले है

उनकी हरकतें उनके
मिज़ाज़ खूब देखें हमनें

उन्हें खबर नहीं हम
उनपे गज़ल लिखनें वाले है


__विपिन दिलवरिया

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