एक मैं और तुम by Vipin Dilwarya

एक मैं और तुम



एक मैं और तुम...
जैसे दरिया के दो किनारे....

जिस राह चलें...
एक साथ रहे एक साथ चलें....

बहता पानी कम हुआ...
तो  नज़दीक  आने  लगे....

बहता पानी बढ़ गया...
तो   दूर   जाने   लगे....

सदियाँ  गुज़र  गई...
वस्ल के इंतज़ार में....

हाँ... 

एक मैं और तुम...
कभी  एक  ना  हो  सके...



__विपिन दिलवरिया


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